PII ऑटो-रिडैक्ट
किसी दस्तावेज़ को आगे भेजने से पहले उसमें मौजूद संवेदनशील नंबर — Aadhaar, PAN, कार्ड, GSTIN, फ़ोन और ईमेल — अपने-आप ढूँढकर काला करें। Aadhaar या कार्ड नंबर का एक भी गलती से हुआ शेयर असली प्राइवेसी उल्लंघन है, और भारत के DPDP Act के तहत निजी डेटा के गलत इस्तेमाल पर जुर्माना लगता है। पहचान और रिडैक्शन दोनों आपके अपने डिवाइस पर होते हैं, इसलिए डेटा किसी सर्वर तक पहुँचता ही नहीं — ब्राउज़र का Network टैब खोलकर आप खुद देख सकते हैं कि कुछ भी अपलोड नहीं हुआ। सिर्फ़ तय फ़ॉर्मेट वाले पहचान नंबर पकड़ता है — नाम या पते नहीं। पेज इमेज में बदल दिए जाते हैं, इसलिए जो काला किया जाता है वह सच में मिट जाता है, सिर्फ़ किसी आयत के नीचे छिपता नहीं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
यह कौन-सा निजी डेटा पहचानता है?
ऐसे स्ट्रक्चर्ड पहचानकर्ता, जिन्हें पैटर्न से पक्के तौर पर पहचाना जा सके: Aadhaar, PAN, क्रेडिट और डेबिट कार्ड नंबर, GSTIN, भारतीय फ़ोन नंबर और ईमेल पते। नाम और पते नहीं पहचाने जाते — उन्हें भरोसेमंद ढंग से खोजने के लिए पैटर्न नहीं, बल्कि मॉडल चाहिए।
क्या फ़ाइल किसी सर्वर पर अपलोड होती है?
नहीं। पहचान और रिडैक्शन दोनों आपके ब्राउज़र में होते हैं, इसीलिए इसे ऐसे डेटा के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है जिसे कहीं भेजने की आपको अनुमति नहीं है — भारत के DPDP Act के तहत आने वाला डेटा भी।
क्या रिडैक्शन स्थायी है?
हाँ। हर पेज को डेटा काला करके एक इमेज के रूप में दोबारा बनाया जाता है, इसलिए टेक्स्ट सिर्फ़ ढका नहीं जाता, पूरी तरह हट जाता है। किसी लाइव टेक्स्ट पर बनाए गए आयत के नीचे टेक्स्ट मौजूद रहता है, और कोई भी PDF रीडर उसे वापस निकाल देगा।
मेरे स्कैन किए गए दस्तावेज़ में इसे कुछ नहीं मिला — क्यों?
फ़ोटो या स्कैन एक इमेज होती है जिसमें चुनने लायक टेक्स्ट नहीं होता, इसलिए पैटर्न के मिलान के लिए कुछ होता ही नहीं। पहले उसे “डॉक स्कैन” में “खोजने लायक बनाएँ” के साथ चलाएँ, फिर नतीजे को यहाँ रिडैक्ट करें।